अप्रैल में केंद्र सरकार को जीएसटी से मिला 5,934 करोड़ रुपए, पिछले साल की तुलना में 87 प्रतिशत कम
लॉकडाउन की वजह से केंद्र सरकार को जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर जबरदस्तझटका लगा है। चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में 5,934 करोड़ रुपए मिले हैं। पिछले साल में इसी महीने में मिले 46,848 करोड़ रुपए की तुलना में यह 87 प्रतिशत कम है।
लॉकडाउन की वजह से जीएसटी कलेक्शन में कमी
यह आंकड़े मार्च की आर्थिक गतिविधियों से संबंधित हैं। रेवेन्यू कलेक्शन में आई इस कमी को लॉक डाउन से जोड़कर देखा जा रहा है। देश में 24 मार्च से कोरोनावायरस को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन शुरू किया गया था। इस वजह से रिटर्न्स फाइलिंग को जून तक के लिए टाल दिया गया है। शुक्रवार को ही जीडीपी के आंकड़े भी जारी किए गए थे जो सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत था। हालांकि उस पर भी असर देखा गया। चूंकि मार्च के अंतिम हफ्ते से लॉकडाउन शुरू हुआ था, इसलिए उस पर जीएसटी की तरह असर नहीं दिखा है।
केंद्र के आंकड़ों से पूरे जीएसटी का परिणाम निकालना संभव नहीं
आंकड़ों से, कुल जीएसटी कलेक्शन का परिणाम निकालना संभव नहीं है, क्योंकि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) आमतौर पर केंद्र की तुलना में अधिक होता है। मसलन, सीजीएसटी मार्च में 19,183 करोड़ रुपए और एसजीएसटी 25,601 करोड़ रुपए था। इसके बाद इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) है और यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कितना आवंटन राज्यों को होता है। अप्रैल में आईजीएसटी 9749 करोड़ रुपए रहा। हालांकि यह पिछले साल के अप्रैल में माइनस 564 करोड़ रुपए से काफी ज्यादा था। माइनस में अगर आंकड़ा रहता है तो केंद्र द्वारा एकत्र की गई तुलना में राज्यों को अधिक आवंटन होते हैं।
लॉकडाउन से पहले मासिक जीएसटी एक लाख करोड़ के करीब होता था
वैसे इससे पहले हर महीने जीएसटी कलेक्शन करीबन एक लाख करोड़ रुपए होता था। हालांकि सरकार ने अप्रैल महीने के कलेक्शन को काफी देर से घोषित किया है। आमतौर पर कलेक्शन का आंकड़ा महीने की अंतिम तारीख या अगले महीने की पहली तारीख तक आ जाता है। वैसे विश्लेषकों का मानना है कि मई महीने के भी जीएसटी कलेक्शन में अच्छी खासी गिरावट दिख सकती है। क्योंकि मई महीने में लॉकडाउन में ढील तो मिली है, पर पूरी तरह से अभी भी गतिविधियां चालू नहीं हो पाई हैं।
लॉकडाउन से जीएसटी भरने और उसके रिटर्न की तारीख बढ़ी
सरकार ने पहले घोषणा की थी कि 5 करोड़ रुपए से कम के कुल वार्षिक कारोबार वाले रजिस्टर्ड जीएसटी करदाता जून 2020 के अंतिम सप्ताह तक मार्च, अप्रैल और मई 2020 के जीएसटीआर-3बी (समरी इनपुट-आउटपुट रिटर्न) दाखिल कर सकते हैं। ऐसे करदाताओं के लिए कोई ब्याज, लेट फीस और पेनाल्टी नहीं देनी होगी। कम से कम 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक के वार्षिक कारोबार वाले लोग जून 2020 के अंतिम सप्ताह तक मार्च, अप्रैल और मई 2020 में रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इस पर तय तिथि से 9 प्रतिशत प्रति वर्ष पर ब्याज दर में कमी लागू होगी। मौजूदा ब्याज दर 18 फीसदी सालाना है। इस साल 30 जून तक जमा होने पर लेट फीस और पेनाल्टी नहीं ली जाएगी।
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