भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना आपदा से उबरने में 6 से 9 महीने का समय लग सकता है, टेलीकॉम-आईटी सेक्टर बनेंगे बड़े सुधारक
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री की ओर से शनिवार को "भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौती" विषय पर आयोजित एक वेबिनार में बिजनेस लीडर्स ने कहा कि कोरोना महामारी और सुपर साइक्लोन से पैदा हुआ आर्थिक संकट से निपटने में भारतीय अर्थव्यवस्था को 6 से 9 महीने का समय लग सकता है। बिजनेस लीडर्स ने कहा कि जनजीवन और अर्थव्यवस्था को उबारने में टेलीकॉम और इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) सेक्टर सबसे बड़े सुधारक के रूप में उभरेंगे।
डिजिटल प्रैक्टिस की ओर तेजी से हो रहा बदलाव
टेक महिंद्रा के एपीएसी बिजनेस के हेड और कॉरपोरेट अफेयर्स के प्रेसीडेंट सुजीत बख्शी ने कहा कि कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया तेजी से न्यू नॉर्मल अपना रही है। इससे काराबोर को डिजिटल प्रैक्टिस की ओर बदलने में तेजी आई है। अर्थव्यवस्था की रीढ़ आईटी सेक्टर ने इस संकट में तेजी से प्रतिक्रिया दी है। इसका कारण यह है कि आईटी इंडस्ट्री पहली से ही डिजिटलाइजेशन के लिए पूरी तरह से तैयार थी। उन्होंने कहा कि आज हमारी 93-94 फीसदी वर्कफोर्स घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रही है। हम इसे इंडस्ट्री के लिए कामकाज में बदलाव के अवसर के रूप में देख रहे हैं। इस दौरान टेलीकॉम सेक्टर के साथ जुड़ाव बढ़ा है जो कोरोना आपदा में लाइफलाइन के तौर पर उभरा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आईटी इंडस्ट्री इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में तेजी से वापसी करेगी।
कुशल नेतृत्व, निश्चितता की आवश्यकता होगी
आईबीएम में इंडिया और साउथ एशिया की वीपी सेल्स प्रतिवा मोहपात्रा ने कहा कि जब न्यू नॉर्मल को धारण कर लिया गया है तो हमें अब कुशल नेतृत्व, निश्चितता, सहानुभूति और टीम वर्क की काफी आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा महामारी के समय में टेलीकॉम इंडस्ट्री नर्वस सिस्टम के रूप में उभरकर सामने आई है। वहीं आईटी इंडस्ट्री मांस और खून के रूप में सामने आई है।
दूरसंचार उद्योग के सामने नवोन्मेषी बनने का अवसर
सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों ने टेलीकॉम इंडस्ट्री को यह अवसर दिया है कि वह नवोन्मेषी बने और महत्वपूर्ण समाधान पेश करे जिनको वैश्विक स्तर पर मापा जा सके। मैथ्यूज ने कहा कि हमारी इंडस्ट्री अनिश्चित वित्तीय संकट से जूझ रही है और इस समय हमें इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की जरूरत है। ताकि हम भविष्य में उभरने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहें।
लॉकडाउन का रियल एस्टेट सेक्टर पर बड़ा प्रभाव
Chintels इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और क्रेडाई एनसीआर के कोषाध्यक्ष प्रशांत सोलोमन ने कहा कि लॉकडाउन का रियल एस्टेट सेक्टर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा नौकरी प्रदाता सेक्टर है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल लचीलेपन के साथ लिक्विडिटी में बढ़ोतरी, वन टाइम लोन रीस्ट्रक्चरिंग जैसी सरकारी पहल इस सेक्टर में रिकवरी के लिए काफी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी आवश्यकताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है और हमें उम्मीद है कि वह हमारी सहायता करेंगे।
मौजूदा आर्थिक संकट भारत के लिए अभूतपूर्व
सीआईआई दिल्ली के चेयरमैन आदित्य बेरलिया ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक मुश्किलें इस साल की दूसरी छमाही में हल होने लगेंगी। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए अभूतपूर्व संकट है और दशकों में ऐसी परिस्थितियां सामने नहीं आई हैं। इसके कारण उद्योग की कुछ श्रेणियों में पांच से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। सरकार ने मध्यम अवधि में सुधार करने वाले कदम उठाए हैं। हमारा मानना है कि इस साल की दूसरी छमाही में चीजें सुधरने लगेंगी। हालांकि, हमें सरकार से कुछ ऐसे उपायों की उम्मीद है, जो उद्योग जगत को छह महीने में नहीं बल्कि अगले सप्ताह से मदद करने लगें।
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