लोन मोराटोरियम का लाभ लेने वाली अधिकांश कंपनियां कोविड-19 से पहले ही चुनौतियों का सामना कर रही थीं
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि लोन मोराटोरियम का लाभ लेने वाली अधिकांश कंपनियां कोविड-19 महामारी से पहले ही वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही थीं। इन कंपनियों की रेटिंग सब इन्वेस्टमेंट ग्रेड में थी। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही है। मोराटोरियम सुविधा के अंतिम दिन जारी रिपोर्ट में क्रिसिल ने कहा कि उसने लोन की नॉन-पेमेंट सुविधा का लाभ लेने वाली गैर वित्तीय सेक्टर की 2300 कंपनियों का आंकलन किया है। इसमें पाया गया है कि तीन-चौथाई कंपनियां सब इन्वेस्टमेंट ग्रेड की हैं।
मार्च में शुरू हुई थी मोराटोरियम सुविधा
कोरोना संक्रमण के आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए मोराटोरियम सुविधा दी थी। यह सुविधा 1 मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे तीन महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए कर दिया था। यानी कुल 6 महीने की मोराटोरियम सुविधा दी गई है। मोराटोरियम की सुविधा लेने वालों को इस अवधि के ब्याज के भुगतान करना होगा। हालांकि, मोराटोरियम अवधि में लोन की किस्त का भुगतान न करने पर कर्ज लेने वाले को डिफॉल्टर घोषित नहीं किया जाएगा।
कई तिमाही से आर्थिक स्लोडाउन की चपेट में थी भारतीय अर्थव्यवस्था
क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पिछली कई तिमाही से स्लोडाउन की चपेट में थी। इस कारण जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 3.1 फीसदी पर आ गई। क्रिसिल के मुताबिक, मोराटोरियम ने मिड साइज सब इन्वेस्टमेंट ग्रेड की कंपनियों को आवश्यकता से ज्यादा लिक्विडी सपोर्ट दी है। साथ ही इन कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल को कमजोर होने से रोका है। मोराटोरियम का लाभ लेने वाली चार में केवल एक कंपनी की रेटिंग ही इन्वेस्टमेंट ग्रेड की रही है।
कोरोना महामारी से सभी सेक्टर प्रभावित: सुबोध राय
क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर सुबोध राय का कहना है कि कोरोना महामारी से सभी सेक्टर के प्रभावित होने के बावजूद कम लचीलेपन वाली ज्यादातर कंपनियों ने मोराटोरियम का लाभ लिया है। कोरोना महामारी के कारण जो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं उनमें जेम्स एंड ज्वैलरी, होटल, ऑटो कंपोनेंट, ऑटोमोबाइल डीलर्स, पावर, पैकेजिंग और कैपिटल गुड्स एंड कंपोनेंट शामिल हैं। इन सेक्टर्स की प्रत्येक 10 में से 5 कंपनियों ने मोराटोरियम का लाभ लिया है। वहीं, कम प्रभावित फार्मास्यूटिक्लस, कैमिकल्स, एफएमसीजी, सेकेंड्री स्टील और एग्रीकल्चर सेक्टर की प्रत्येक 10 में से केवल 1 कंपनी ने मोराटोरियम का लाभ लिया है।
छोटे साइज की ज्यादा कंपनियों ने लिया मोराटोरिटम
एजेंसी का कहना है कि मोराटोरियम लेने में कंपनियों के रेवेन्यू साइज का अहम रोल रहा है। 1500 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली कंपनियों के मुकाबले 300 से 1500 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली ज्यादा कंपनियों ने मोराटोरियम का लाभ लिया है। क्रिसिल के डायरेक्टर राहुल गुहा का कहना है कि मोराटोरियम ने सपाट कारोबारी वातावरण में कंपनियों को वर्किंग कैपिटल और कैश फ्लो बनाए रखने में मदद की है। एजेंसी के मुताबिक, मांग का वातावरण लगातार स्थिर रहेगा। इससे आने वाली दो-तीन तिमाही तक कम लचीलेपन वाले सेक्टर्स की कंपनियों के सामने तनाव बना रहेगा। मंगलवार से लागू होने वाली कर्ज रीस्ट्रक्चरिंग सुविधा मिड साइज वाली कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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