लक्ष्मी विलास बैंक का DBS बैंक में विलय पूरा हुआ, डिपॉजिटर्स के सेविंग और FD रेट में कोई बदलाव नहीं
लक्ष्मी विलास बैंक (LVB) का DBS बैंक इंडिया लिमिटेड (DBIL) में विलय हो गया। LVB के ग्राहक अब सभी बैंकिंग सेवा हासिल कर सकते हैं और उनके लिए सेविंग और FD रेट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। DBS बैंक ने सोमवार को एक बयान में कहा कि विलय की योजना को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 45 के तहत भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विशेषाधिकारों के तहत अंजाम दिया गया है और यह 27 नवंबर 2020 को प्रभावी हो चुका है।
बयान में कहा गया है कि इस विलय से LVB के डिपॉजिटर्स, कस्टमर्स और कर्मचारियों को राहत मिली है। LVB पर लगाया गया मोरेटोरियम 27 नवंबर 2020 को हटा लिया गया और इसके तत्काल बाद सभी बैंकिंग सेवाएं बहाल कर दी गईं और सभी शाखाएं, डिजिटल चैनल और ATM पहले की तरह से काम करने लगे हैं। LVB के ग्राहक अब सभी बैंकिंग सेवाएं हासिल कर सकते हैं।
LVB के सभी कर्मचारी पहले के समान शर्तों पर अब DBIL के कर्मचारी हैं
LVB पहले सेविंग बैंक अकाउंट्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर जो ब्याज दे रहा था, वही अगले नोटिस तक मिलता रहेगा। LVB के सभी कर्मचारी सेवा में बने रहेंगे और वे पहले के समान शर्तों पर अब DBIL के कर्मचारी हैं। LVB के सिस्टम और नेटवर्क को आने वाले महीनों में DBS में जोड़ने के लिए DBS की टीम LVB के कर्मचारियों के साथ काम कर रही है।
DBS ग्रुप DBIL में 2,500 करोड़ रुपए का निवेश करेगा
DBIL ने कहा कि वह अच्छी तरह कैपिटलाइज्ड है और उसका कैपिटल एडीक्वेसी रेश्यो (CAR) विलय के बाद भी रेगुलेटरी मानक से ऊपर रहेगा। साथ ही DBS ग्रुप विलय में सहायता और भावी विकास के लिए DBIL में 2,500 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। यह निवेश पूरी तर से DBS ग्रुप के मौजूदा संसाधनों से जुटाया जाएगा।
DBIL के ग्राहक बढ़े और ज्यादा शहरों में उपस्थिति मिली
DBIL सिंगापुर के DBS ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड का होली ओंड सब्सिडियरी है। DBS भारत में 1994 से काम कर रहा है और उसने अपने भारतीय कारोबार को मार्च 2019 में होली ओंड सब्सिडियरी में बदल लिया है। DBIL के CEO सुरोजित शोम ने कहा कि LVB के विलय से हमें ज्यादा ग्राहक मिले हैं और उन शहरों में भी हमारी मौजूदगी हो गई है, जहां पहले हमारा नेटवर्क नहीं था।
LVB पर 17 नवंबर को 30 दिनों का मोरेटोरियम लगा था
संकट में फंसे LVB पर 17 नवंबर को 30 दिनों का मोरेटोरियम लगाया गया था। बैंक के डिपॉजिटर्स पर अधिकतम 25,000 रुपए निकालने की सीमा लगा दी गई थी। इसी के साथ RBI ने LVB का DBIL में विलय करने की एक मसौदा योजना की भी घोषणा कर दी थी।
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