कम उधारी की मांग और लोन रिकवरी में दिक्कत के कारण NBFC को हो सकता है भारी घाटा
लोन की रिकवरी न हो पाने और कम उधारी की मांग के कारण NBFC के फायदे में कमी आ सकती है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कैश को बचाए रखने की आदत के कारण भी एनबीएफसी के फायदे में गिरावट आ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2019-20 के बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
असेट क्वालिटी को साइड किया
लोन मोरेटोरियम और परिसंपत्ति वर्गीकरण (asset classification) में ठहराव के कारण, असेट क्वालिटी को किनारे कर दिया गया। हालांकि, कई गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFC) ने इसके मद्देनजर एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ईसीएल) के अनुसार अतिरिक्त प्रावधान किया है। डिविडेंड के जरिए अपनी कैपिटल पोजीशन को चलायमान बनाये हुए हैं।
एनबीएफसी के लोन मोरेटोरियम की संख्या कम रही
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, मोरेटोरियम का लाभ उठाने वाले ग्राहकों की संख्या NBFC के लिए कम रही है। जबकि कमर्शियल बैंकों के ग्राहकों की संख्या ज्यादा थी। 31 अगस्त, 2020 तक NBFC के कुल ग्राहकों में से लगभग 26.6 पर्सेंट ने मोरेटोरियम का फायदा उठाया। उनके कुल लोन आउटस्टैंडिंग का यह लगभग 44.9 पर्सेंट था।
लोन में स्थिर बढ़त रही है
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोन में स्थिर बढ़त (stagnant growth) रही है। चुनौतीपूर्ण आर्थिक वातावरण जोखिम भी रहे हैं। इससे बचने के लिए 2019-20 में एनबीएफसी की कंसोलिडेटेड बैलेंस शीट में गिरावट आई। 2020-21 के पहले हाफ में, हालांकि NBFC की बैलेंस शीट में थोड़ी बहुत वृद्धि हुई। साथ ही असेट क्वालिटी में मामूली गिरावट आई।
आरबीआई और सरकार ने किए उपाय
आरबीआई और सरकार ने लिक्विडिटी बढ़ाने और बाजार का विश्वास बहाल करने के लिए विभिन्न उपाय किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक गतिविधियों के कम रहने की उम्मीद है, लेकिन मजबूत एनबीएफसी उम्मीद बनाए रखी हैं। अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रही हैं। क्योंकि कई NBFC ने अच्छे कलेक्शन से रिकवरी कर कोरोना के पहले के स्तरों पर लौट आने की दस्तक दे दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) ने 2019-20 में कई दिक्कतों का अनुभव किया। इसमें क्रेडिट ग्रोथ में मंदी, फायदा और असेट क्वालिटी में गिरावट प्रमुख हैं।
इंडस्ट्री सेक्टर को ज्यादा लोन
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में इंडस्ट्री सेक्टर को NBFC ने ज्यादा लोन दिया। इसके बाद रिटेल लोन और सर्विसेज सेक्टर हैं। 2019-20 के दौरान, रिटेल लोन, हाउसिंग लोन और व्हीकल लोन सबसे ऊपर थे। एनबीएफसी को कमर्शियल पेपर (सीपी) के माध्यम से लोन देने में वृद्धि सितंबर 2020 तक धीमी रही और 2020-2021 की पहली तिमाही में इसमें थोड़ी तेजी आई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनबीएफसी के पेपर्स में म्यूचुअल फंडों का कम होता विश्वास 2019-20 और 2020-21 (जून 2020) तक जारी रहा। हालांकि, उनका निवेश काफी हद तक कुछ बड़ी और अच्छी तरह से रेटेड एनबीएफसी तक सीमित था।
म्यूचुअल फंड ने निवेश घटाया
मीडियम एनबीएफसी के एनसीडी में म्यूचुअल फंड्स ने 2019-20 की दूसरी छमाही में निवेश घटा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि म्युचुअल फंडों ने छोटे एनबीएफसी के एनसीडी और सीपी का केवल मामूली हिस्सा रखा, लेकिन मार्च 2020 और जून 2020 में कोरोना के बढ़े जोखिम से बाहर निकल गए।
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